Sunday, February 8, 2009

आज मेरा मन भर आया...

आज मेरा मन भर आया जब याद किए ये गुजरे दिन
आँखे भी नम हो आयीं, आँसू न रुकेंगे छलके बिन

सच, कितना प्यार समेटे है शिक्षा की ये भूमि महान
समझ सका न कभी आज तक गता रहा दुखों का गान

घर से तो आए दूर मगर, आज़ादी का अधिकार मिला
जहाँ सब राजा अपने मन के, ऐसा मोहक संसार मिला

बगिया बदली माली बदले, नए रंग के फूल खिले
अपनी अपनी खुशबू लेके हम नई दिशाओं में निकले

आंख खुली तो क्या पाया, उन्मुक्त नील आकाश अनंत
पर थे कोमल और मन था कच्चा पर छूने थे सब दिग-दिगंत

कई बार गिरे चोटें खायीं, आशा का एक सहारा था
खुल गए पंख तो क्या कहना, सारा ही गगन हमारा था

बुन गई कहानी अज़ब-गज़ब, उन शामों की झिलमिल कतरन
कितने ही किस्से बीत चले, थोड़ी मस्ती थोड़ी अनबन

नन्हे नन्हे फूलों जैसी, छोटी छोटी कितनी बातें
हर रोज़ नए नए सपने, दिन बीत गए हंसते गाते

खुशियों के इन्द्रधनुष जैसी, कुछ घड़ियाँ ऐसी भी महकीं
अब तक साँसों में तैर रही, खुशबू उन प्यारे लम्हों की

बेचैन हृदय के कोने में कोई बात पुरानी बाकी है
चुपचाप अकेले बैठी है, बहार आते घबराती है

वो याद बहुत ही कोमल है, रखता हूँ परदे में हर दम
शायद अब भी ना छू पाऊँ, दिल के तारों की वो सरगम

है कितनी बातें कहने को, पर शब्द नही अब पास मेरे
कुछ उमड़ घुमड़ मेरे मन को, भावुकता के बदल घेरे

अब समय हो चला जाने का, अलविदा सभी हम-प्यालों को
इससे पहले कि छलक पड़ें, पलकों में सुला दूँ ख्यालों को

अच्छे या बुरे जैसे भी हम है, कभी याद तो करना तुम लेकिन
आज मेरा मन भर आया जब याद किए ये गुजरे दिन
आज मेरा मन भर आया जब याद किए ये गुजरे दिन |

नोट: ये कविता मैंने आई आई टी में आखिरी सेमेस्टर में लिखी थी|

2 comments:

  1. बहुत बढिया रचना है बधाई।

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  2. धन्यवाद परमजीत, कवि की रचना की सफलता तो पढ़ने वाले की सराहना से ही पता चलती है। मुझे ये जान कर अच्छा लगा की मेरी कविता आपको पसंद आई।

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