Monday, March 16, 2009

नन्हा आगंतुक

जन्म दे रहे इक सपने को आशाओं के ताने बाने
हो गई पूरी एक प्रतीक्षा, खड़ी दूसरी सांसे थामे।

जीवन की कोई बिन्दु कोख में, कुम्भकार की कच्ची माटी
समय चक्र के पहिये पर ये, नए रूप में ढलती जाती।

सपनों से सपनों का जुड़ना, आशाओं से आशाओं का
जन्म हुआ माँ की ममता का, और पिता के भावों का।

नामों पे अब बहस छिड़ेगी, अटकल में बीतेंगी रातें
बदल जायेगी जीवनचर्या, करने को अब कितनी बातें।

होगी कोई देव लोक से परी कथाओं की कोई बाला
या फ़िर सबको नाच नाचता नटखट नटवर नन्द का लाला।

छिपी बात फ़िर निकल पड़ेगी बाँध पोटली अटकल वाली
दबें पाँव से खुसफुस कर के ख़बर बन चली और निराली।

काल चक्र को पंख लग गए, हुई उड़न छू समय पिटारी
हलके फुलके सपने बन गए भारी भरकम जिम्मेदारी।

नन्हे मुन्हे आगंतुक का, चलो करे सब मिल कर स्वागत
जीवन धारा चलती जाए, एक जन्म से फ़िर अगले तक।

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