Monday, May 18, 2009

ये मां है ....

पहली हलचल से पहली धड़कन तक
पहली साँस से पहले कदम तक
पहले शब्द से पहली शिकायत तक
पहली हंसी से पहले आंसू तक।

किसी का परिश्रम है, अनवरत, असाधारण और निष्काम।
अनवरत इसलिए कि, नन्हा सा असक्षम जीवन
निर्भर है किसी पर, जीवन की हर प्रक्रिया समझने के लिए
और दुनिया से सतत अपने तार जुड़े रखने के लिए
असाधारण इसलिए कि, वो इंसान है।
अपने से पहले किसी और की जरूरते पूरा करना
तन मन की सारी शक्ति एक लक्ष्य में झोंक देना
कष्ट को सौभाग्य समझना और उसे कर्त्तव्य की भांति निभाना
ये साधारण हो सकता है?
निष्काम इसलिए कि, त्याग है उसके कर्म का आधार।
भावना और प्रेम के आगे, उसके अपने होने या न होने से भी परे

उसकी हर सोंच में तपस्या है, उसके लिए हर दिन एक अग्नि परीक्षा है
अग्नि परिक्षा,
उसके संयम की, दृढ़ता की और आत्मविश्वास की
इस स्वयं की बनायीं अग्निपरीक्षा में उसके आत्मसम्मान की झलक है
अपनी पहचान बनाये रखने वाले अटूट अभिमान की ललक है।

हर नए जीवन को दुनिया में लाने के साथ ही
ये शुरू करती है एक नया संघर्ष, एक नयी लड़ाई
और इस संघर्ष के हर क्षण में,
वही ऊर्जा,
वही परिश्रम,
वही समर्पण।

ये परिभाषित करती है जिजीविषा को,
ये अर्थ देती है मानवता के मूल्यों को,
ये भूलोक और देवलोक के बीच की कड़ी है,
ये इंसान से भगवान बना देने वाले यज्ञ की आहुति है,

ये माँ है।

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